| Crop |
लाल सरसों |
| Local Name |
सरसों |
| Scientific Name |
Brassica campestris |
| Variety |
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| Landscape /Habitat |
उच्च भूमि जहाँ जल जमाव कम होता है | |
| Local State (Past) |
पर्याप्त मात्रा में |
| Local State (Present) |
पहले से कम मात्रा में |
| Cropping Season |
फ़रवरी से अप्रैल |
| Special Features |
इसके पौधों को कम पानी की आवश्यकता होती है। यह तेलहन प्रजाति का पौधा होता है। इसमें पीले फूल बहुतायत से लगते हैं। इसके फूलों से उच्च किस्म का शहद बनता है। इसके दाने बहुत छोटे एवं महीन होते हैं। |
| Uses |
इसके तेल का उपयोग व्यजन बनाने, अचार बनाने , पूजा -पाठ में, शरीर की मालिश में, बालों में किया जाता है। मशालों में भी सरसों के दानों का इस्तेमाल होता आया है। हरे पत्तों का साग के रुप में उपयोग होता है। |
| Associated TK |
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| Source of Seeds/Plants: |
कृषक मित्र, पिछली फसल के बीज |
| Approx. area shown: |
21 |
| Other Details |
सूखे डंठल एवं हरे पत्ते जानवरों का चारा है। इसकी उपज राई की उपज से ज्यादा होती हैं।
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| Community/ Knowledge Holder |
कृषक वर्ग यथा संथाली, मुस्लिम, तेली, ग्वाला, कोइरी, बढ़ई, हलवाई, पहाड़िया, राजपूत |
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