| Crop |
चना |
| Local Name |
चना |
| Scientific Name |
Cicer arietinum |
| Variety |
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| Landscape /Habitat |
उच्च भूमि जहाँ जल जमाव कम होता है | |
| Local State (Past) |
पर्याप्त मात्रा में |
| Local State (Present) |
कम मात्रा में |
| Cropping Season |
जनवरी से अप्रैल |
| Special Features |
इस फसल को जल की कम आवश्यकता होती है। यह बहुत छोटा झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसके पत्ते कोमल और नमकीन होते है। इसकी उंचाई 1 फीट तक की होती है। एक पौधे में दानों की कई फल्लिया लगती है। |
| Uses |
इसके दानों और फल्लियों का उपयोग दाल, मिठाई, सब्जी, सत्तु, आदि के रुप में होता है। कच्चे फल्लियों के बीज भाग को खाया जाता है। ग्रामीण हरे पत्ते साग के रूप में खाते है | सूखे दानो को पीसकर आटा , बेसन एवं सत्तू बनाया जाता है इसके छिलके जानवरों द्वारा खाए जाते है | |
| Associated TK |
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| Source of Seeds/Plants: |
कृषकों द्वारा भडारण एवं स्थानीय बाजार, कृषि मित्र |
| Approx. area shown: |
25 |
| Other Details |
इसे एक शक्तिवर्धक अन्नाज के तौर पर देखा जाता है|ग्रामीण इसका विविध रूपों में उपयोग करते आये है |इसकी पैदावार मुख्य फसलो की तुलना में कम है | |
| Community/ Knowledge Holder |
कृषक वर्ग यथा संथाली, मुस्लिम तेली. ग्वाला, कोइरी, बढ़ई हलवाई पहाडिया, राजपूत |
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